हमारी अध्यक्षा  

Chairperson NBB

श्रीमती शालू जिन्दल


यह ‘‘अद्भुत‘‘ ही है यदि हम आत्मोत्सर्ग को मूर्त रूप दे सकें............ बजाय इसके कि हम इसे अपनी सोच के भरोसे छोड़ दें।

यही वह दर्शन है जिसे श्रीमती शालू जिन्दल ने अपने स्वप्नों को पूरा करने की सामथ्‍​र्य ही है। हमारी अध्यक्ष बहुमुखी प्रतिमा, करिश्माई व्यक्तित्व की धनी और अत्याधुनिक शैली से ओत-प्रोत है। वे समाज, धमार्थ एवं कल्याणकारी कार्यों में बड़े पैमाने में एक ‘सीधे पात्र तक’ सम्पर्क रखने की सार्थकता में विश्वास और निपुणता रखती हैं और इस दिशा में गतिशील हैं। वे कला- प्रेमी, संस्कृति की सम्पोषक हैं और कुचीपुड़ी सरीखे महान पारंपरिक नृत्य की नवीनतम शैली की दिशा में अनथक रूप से प्रयासरत है और इस भारतीय पारंपरिक नृत्य को पूर्ण महारत, अद्वितीय कलात्मकता एवं पूरी गहराई एवं बेजोड़ उत्कृष्ठा से नृत्य की प्रस्तुति देती हैं, जो देखते ही बनती है। वे जीवन को प्रारम्भिक काल से ही नृत्य की ओर उन्मुख हुई है और इसकी शुरूआत सौभाग्य से भगवान तिरूपति के पद्म कमल पर कदाचित ‘प्रारब्ध’ के चलते उनके गुरू सर्वश्री पद्म भूषण राजा-राधा और कौशल्या रेड्डी की प्रेरणा से कुचीपुड़ी नृत्य की दुनिया से हैं। श्रीमती जिन्दल भारत के अन्य भागों में कुचीपुड़ी नृत्य को लोकप्रिय बनाने की दिशा में प्रयास कर रही हैं। वे भक्तिमय गीतों (जैसे मीराबाई के भजन) तथा संगीत (सूफी गीत एवं अंग्रेजी काव्य द्वारा) के साथ-साथ जहां वे नृत्य-प्रस्तुति देती हैं, वहीं की भाषा में कुचीपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति द्वारा विधा कार्य को सम्पादित कर रही है। अनेक वर्ष में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय उनकी प्रस्तुतियों में उनकी शालीनता, लालित्य चेतना एवं नृत्य को देखकर दर्शक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। इस नृत्य-विधा का भारत एवं विदेश में लोकप्रिय बनाने व इसके विस्तार के लिए एक कुचीपुड़ी प्रतिष्ठान स्थापित करने की भी उनकी योजना है भारतीय कुचीपुड़ी पारंपरिक नृत्य विद्या को संस्थापित करने की दिशा में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। जिन्दल कला एवं संस्कृति केन्द्र परियोजना उनके मन-मस्तिष्क में बसी है उनका अगला प्रयास दिल्ली और अंगुल, उड़ीसा में शीघ्र ही इस विद्या का शुभारम्भ करना है। दिल्ली स्थित केन्द्र में पारंपरिक नृत्य तथा कला के अन्य रूपों/प्रविधियों में प्रशिक्षण एवं कार्यशालायें आयोजित करता है, ताकि हमारी समृद्ध विरासत की लोकप्रियता जागरूकता का सृजन एवं विधा को अक्षुण बनाया जा सके।

अंगुल अकादमी के 10 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में आवासीय परिसर में छात्रों को नृत्य एवं सृजनात्मक कलाओं में प्रशिक्षण सुविधा प्रदान की जाएगी। यह संस्थान साधन से वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करेगा, जिससे वे पारंपरिक कलाओं को अपने जीवन का कैरियर बना सकें।

वे जिन्दल पॉवर लिमिटेड में निदेशक एवं जिन्दल स्टील एण्ड पॉवर फाउण्डेशन में सह-चेयरपर्सन है और इस निकाय में सी.एस.आर पहल की उपाध्यक्ष भी हैं। वे केन्द्रीय संस्कृति सलाहकार बोर्ड, भारत सरकार की भी सदस्य हैं। उन्होंने तिरंगा, माई लाईफ, माई वर्ड्स एण्ड फ्रीडम सरीखी पुस्तकें भी संकलित की है। उन्होंने बच्चों के लिए अपनी प्रथम विख्यात पुस्तक ‘‘इंडिया : एन अल्फाबेट राईड’’ प्रस्तुत भी लिखी है। इस पुस्तक में विस्तृत रेखा चित्रों के माध्यम से भारत के बारे में विभिन्न पहलुओं को परिभाषित करने के लिए वर्णाक्षरों का उपयोग किया गया है, जिसमें भारत के समृद्ध इतिहास, वास्तुविज्ञान(खान-पान, रीति-रिवाज और भाषा के वैविध्य एवं हमारी व्यवस्था, जीवन-शैली और रंग-ढंग को रूपायित किया गया है।)

कैंसर के प्रति जन-चेतना का सृजन करने के उद्देश्य से श्रीमती शालू जिन्दल विश्व में माउण्ट किलिमंजारो, लंजानिया की सात शिखर वात्र्ताओं में गए शिखर मंडल का हिस्सा रही है। हाल में उन्हें अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया है, जिनमें गंदर्भ कला परिषद् भुवनेश्वर, मई 2015 में नृत्य के लिए ‘‘कलाश्री सम्मान’’ भारतीय मूल्यों के परिसम्वद्र्धन की एक एन.जी.ओ. भारत निर्माण द्वारा नृत्य भारतीय पारंपरिक नृत्य की श्रेणी में 35 वीमेन एम्पॉवरमेन्ट अवार्ड 2014, भारतीय पारंपरिक नृत्य-कुचीपुड़ी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘आर्ट कराट अवार्ड’ आदि शामिल हैं।

उनके जीवन का सूत्र-वाक्य है :- हम जो भी काम करें, भू-मण्डल पर हमारा जीवन सार्थक होना चाहिए।