प्रकाशन



वार्षिक प्रतिवेदन और वार्षिक लेखा




वार्षिक प्रतिवेदन और वार्षिक लेखा 2015 - 2016


वार्षिक प्रतिवेदन 2014 - 2015

वार्षिक लेखा 2014 - 2015



वार्षिक प्रतिवेदन 2013 - 2014

वार्षिक लेखा 2013 - 2014



वार्षिक प्रतिवेदन 2012 - 2013

वार्षिक लेखा 2012 - 2013



वार्षिक प्रतिवेदन 2011 - 2012

वार्षिक लेखा 2011 - 2012


साहित्यिक सम्मेलनों का संकलन


राष्ट्रीय बाल भवन बच्चों के लेखकों/संपादकों/चित्रांकनकर्ताओं, मुद्रकों तथा पाठकों (बच्चों) को विशिष्ट अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ उन्हें एक दूसरे से संवाद करने का मौका मिलता है। इस प्रकार के संवाद से लेखकों को अपने श्रोताओं/पाठकों के बारे में और जानने का मौका मिलता है, प्रकाशकों को बच्चों के लिए बेहतर प्रकाशन जारी करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। बच्चों को भी पढ़ने, लिखने, साहित्य की समझ विकसित करने की प्रेरणा के अतिरिक्त अपने मनपसंद लेखकों से मिलने का मौका भी मिलता है। ऐसा पहला सम्मेलन 1993 में आयोजित किया गया। 2004 तक ऐसे नौ सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका था। इन सम्मेलनों में हुए विचार-विमर्श को संकलित कर राष्ट्रीय बाल भवन ने नौ पुस्तकों का आकार दे दिया। ये नौ पुस्तकें हैं – त्रिविधा, त्रिधारा, त्रिपदा, त्रिदिशा, त्रिपथगा, त्रिवेणी, त्रिसंध्या, त्रिसंगम तथा त्रिवर्णा। इन सभी पुस्तकों का प्रयोग बाल साहित्य के क्षेत्र में काम कर रहे अध्यापकों, लेखकों प्रकाशकों तथा शोधकर्ताओं द्वारा संदर्भ सामग्री के रूप में किया जा रहा है।

अक्कड़ बक्कड़ तथा अक्कड़ बक्कड़ टाईम्स

राष्ट्रीय बाल भवन को अपनी तरह के पहले अनूठे प्रयोग का श्रेय दिया जा सकता है। यह प्रयास था - पूर्ण रूप से बच्चों द्वारा तैयार की गई बुकलेट की प्रस्तुति। इसके लेख बच्चों द्वारा लिखे जाते हैं और ग्राफिक भी बच्चों द्वारा ही बनाए जाते हैं। बच्चों का ही एक संपादक मंडल है जो लेखों का चुनाव और उनका संपादन करते हैं, फोटोग्राफ, ग्राफिक तथा मुखपृष्ठ का चुनाव करते हैं। और भी, बच्चे ले-आउट की योजना भी खुद ही बनाते हैं और फिर बुकलेट का प्रकाशन कर दिया जाता है। इस प्रकार, अक्कड़-बक्कड़ को ठीक ही बच्चों की, बच्चों द्वारा तथा बच्चों के लिए बुकलेट की संज्ञा दी जा सकती है। ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान, जब हजारों बच्चे बाल भवन के कार्यकलाप में भाग लेते हैं तो अक्कड़ बक्कड़ के विस्तार के रूप में साप्ताहिक बाल समाचार-पत्र ‘अक्कड़ बक्कड़ टाईम्स’ का प्रकाशन किया जाता है। इस समाचार-पत्र का सारा काम भी बच्चों के प्रयासों से ही किया जाता है। समाचार रिपोर्ट, इंटरव्यू तथा फीचर आदि भी बच्चों द्वारा खुद ही लिखे जाते हैं।


सुलक्ष्य

पर्यावरण आधारित मल्टीमीडिया ‘संचारण’

प्रयोगात्मक पुस्तकें

‘द मैजिक आई’