फोटोग्राफी

फोटोग्राफी तकनीक


Photography फोटोग्राफी एक ऐसी विद्या है, जो कभी चलन से बाहर नहीं होगी, क्योंकि इसमें वास्तव में समय को रोक लेने की क्षमता है। एक बच्चा फोटो में हमेशा बच्चा ही रहता है और पक्षी उड़ता ही रहता है। इस तरह फोटोग्राफी सतत गतिमान शाश्वत समय में से एक क्षण को कैद कर लेती है और यही इसकी खूबी और सबसे बड़ा आकर्षण है। फोटोग्राफी के एक युवा विशेषज्ञ जोअल सारटोर का कथन है कि मेरे लिए एक सुंदर तस्वीर में तीन चीजें जरूर होनी चाहिए - इसका प्रकाश अच्छा होना चाहिए, कंपोज अच्छी तरह होनी चाहिए, पृष्ठभूमि ऐसी हो जो मुख्य विषय से मेल न खाये और इसमें किसी एक ऐसे क्षण को संजोना चाहिए जो या तो एक भाव या किसी विशेष दृश्य को कैद कर लें। इन सब में भी फोटो लिए जाने के समय का महत्व बहुत अधिक है। सबसे अच्छे फोटो वे हैं, जो असंभव प्रतीत होते हैं, सामान्य तरीके से सोचे जाने पर विश्वास से परे प्रतीत होते हैं। इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण जिमब्राउनबर्ग का एक आइसबर्ग से दूसरे आइसबर्ग पर कूदते हुए सफेद भेडि़ये का फोटो है। इस फोटो की पृष्ठभूमि बिल्कुल सहज है तथा इसे बहुत अच्छे तरीके से कंपोज़ किया गया है और इसमें कैद क्षण तो बिल्कुल उपयुक्त हैं - ‘‘हवा में झूल रहा भेडि़या’’/ भारत एक ऐसा देश है जहाँ ऐसे प्रयासों में सदियों का अस्तित्व समाया है तथा इस प्रकार यहाँ फोटोग्राफी की कला में महारत हासिल करना परिस्थिति-जन्य की माँग के अनुरूप होता है।


फोटोग्राफी में बच्चों को फोटोग्राफी से जुड़ी तकनीकों जैसे कैमरे के सभी सहायक साधनों सहित उसे इस्तेमाल कर पाने की तकनीक, दृश्य को फोकस करने विभिन्न प्रकार के प्रकाशों में कैमरे के प्रयोग तथा विभिन्न प्रकार की फिल्मों का प्रयोग सिखाया जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें उपयुक्त विषय का चुनाव करना, उपलब्ध तथा अप्राकृतिक प्रकाश का सर्वोत्तम प्रयोग, शटर की सही गति, सही एक्सपोजर, विविध फिल्टरों का प्रयोग तथा सही कोण का चुनाव, जिससे फोटो लिया जाना चाहिए आदि सिखाया जाता है। उन्हें फिल्म प्रोसेस करने तथा इससे जुड़ी ‘डार्क रूम’ की अन्य तकनीकों के बारे में भी सिखाया जाता है। इसमें फोटोग्राफों को ‘डेवलप’ करने में प्रयुक्त होने वाले रासायनिक घोल के आवश्यक रसायनों आदि की जानकारी शामिल है। बच्चों को खुद अपने फोटोग्राफ की फिल्म को प्रोसेस करने, निगेटिव से कारैक्ट शीट बनाने तथा ‘इनलार्ज का प्रयोग कर चयनित फोटो को बड़ा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इनके जरिए बच्चे सभी फोटो को संपूर्ण फोटो प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्शित करने तक की तमाम तकनीकें सीखते हैं।

कार्यकलाप के तौर पर फोटोग्राफी के मूलभूत उद्देश्य निम्नलिखित हैं :-


  • बच्चों को कैमरे का प्रयोग करने के लिए निर्बाध वातावरण उपलब्ध कराना ताकि वे आत्मविश्वास के साथ इसका प्रयोग सकें।

  • बच्चों को अनुभव कराना कि फोटोग्राफी करते हुए केवल फोटोग्राफी तकनीकों का प्रयोग ही महत्वपूर्ण नहीं है अपितु अधिक महत्व उनकी सृजनात्मक दृष्टि का है।

  • बच्चों के सामने फोटोग्राफी एवं विडियोग्राफी को संभावित व्यवसाय के रूप में पेश करना।

  • किसी भी वीडियो कार्यक्रम की सफलता के लिए सामूहिक कार्य की महता को बच्चों को समझाना।

  • फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी के माध्यम से हमारे देश के विभिन्न भागों में रह रहे निवासियों, उनके जीवन जीने के तौर तरीकों, आदतों, आवश्यकताओं, रीति- रिवाजों,

    संस्कृति आदि से बच्चों को परिचित कराना।

  • बच्चों को फोटो खींचने हेतु उपयुक्त असामान्य स्थितियों की खोज कर इन्हें कैमरे में कैद करने की क्षमता विकसित करना और ऐसा करने पर इससे होने वाली संतुष्टि, खुशी तथा

    रोमांच का अनुभव कराना।


‘स्टिल कैमरे’ के अतिरिक्त बच्चे वीडियो कैमरा प्रयोग करना भी सीखते हैं तथा वे स्वयं अपना वीडियो कार्यक्रम भी बना सकते हैं। वीडियोग्राफी में बच्चों को एक दृश्य के बारे में सोचकर उसकी कैमरा स्क्रिप्ट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्हें एक वीडियो कार्यक्रम लिखने की तकनीक तथा कार्यक्रम तैयार करने के विभिन्न चरणों की जानकारी दी जाती है। इसके बाद उन्हें स्क्रिप्ट की आवश्यकतानुसार फोटो खींचने, संपादन, ध्वनि रिकार्डिंग, धुनों/संगीत का चयन तथा ध्वनि के प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी जाती हैं। सबसे अधिक उत्साहजनक इस कार्यकलाप का वह भाग है, जिसमें बच्चे इस सारी जानकारी का प्रयोग वास्तवविक फोटोग्राफी में करते हैं। इस प्रकार जो कार्यक्रम तैयार होते हैं उन्हें वास्तव में ‘बच्चों द्वारा, बच्चों के लिए, बच्चों का कार्यक्रम’ कहा जा सकता है। वीडियो कार्यक्रम बनाते समय, बच्चों को समूहों में बाँट दिया जाता है और प्रत्येक समूह को अलग कार्यक्रम बनाना होता है। इस प्रकार, वे वीडियो कार्यक्रम निर्माण के विभिन्न पहलुओं को सीखने-समझने के साथ-साथ एक दूसरे से मिल- जुलकर काम करना भी सीखते हैं।

कार्यकलाप के तौर पर फोटोग्राफी ग्रामीण बच्चों के लिए भी जवाहर बाल भवन, माण्डी में उपलब्ध हैं। इसे उनके सामने संभावित व्यवसाय तथा ऐसे कौशल के रूप मे प्रस्तुत किया जाता है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सके। कुछ बाल केन्द्रों में भी फोटोग्राफी उपलब्ध है। इस कार्यकलाप के अंर्तगत विशेष फोटोग्राफी कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाती हैं तथा बाल केन्द्रों के बच्चे भी इसमें भाग लेते हैं। कभी-कभी अध्यापकों और अभिभावकों के लिए भी कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। इस कार्यकलाप के एक भाग के रूप में नियमित रूप से आयोजित ‘फोटोग्राफी भ्रमण’ में उन्हें विभिन्न स्थानों पर घूमने का मौका भी मिलता है, जहाँ उन्हें दृश्यों को कैमरे में कैद करने का तथा फिल्म के लिए अपने विषयों को सोचने का पर्याप्त अवसर प्राप्त होता है। कभी-कभी ‘स्लाईड निर्माण’ पर विशेष फोटोग्राफी कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाती हैं।

बच्चों को ‘स्लाईड निर्माण’ की तकनीकें सिखाई जाती हैं तथा किसी विषय विशेष पर संपूर्ण दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति निर्माण की तकनीकें भी सिखाई जाती हैं। एक दृश्य माध्यम के रूप में स्लाईड की अपनी विशेषताएं हैं :-

पहली तो यह कि उन्हें अपने आकार से कई गुना तक बड़ा किया जा सकता है और इस प्रकार फोटो की छोटी से छोटी बात को भी सविस्तार पूरा दिखाया जा सकता है। दूसरे, स्लाईड के आकार को ‘डार्करूम’ में प्रोजेक्टर के माध्यम से बढ़ाया जाता है। अत: दर्शक का सारा ध्यान फोटो/तस्वीर पर ही केन्द्रित होता है। इस तरह सही पृष्ठभूमि एवं सही व्याख्या के साथ इसे एक बेहतरीन शिक्षण माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। दृश्य-श्रव्य कार्यक्रम के लिए स्क्रिप्ट लिखना तथा सही पृष्ठभूमि संगीत का चयन अनिवार्य रूप से उनमें टीमकार्य की भावना को पुष्ट करेगा। यह कार्यकलाप अपने आप में ही इसे करने में शामिल बच्चों के लिए शैक्षणिक रूप से अति लाभकारी रहेगा।