राष्ट्रीय बाल भवन में आपका स्वागत है।



राष्ट्रीय बाल भवन एक ऐसा संस्थान है जो बच्चों को उनकी आयु, रूचि एवं योग्यता के अनुसार उनके लिए विविध कार्यकलापों के आयोजन द्वारा विविध अवसर तथा विचार विमर्ष करने, सृजन करने तथा प्रदर्षन के लिए साझा मंच उपलब्ध करवाकर उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को तराषता है। यह बच्चों को किसी भी तनाव या दबाव से मुक्त, नर्इ चीजें सीखने के लिए असीमित अवसरों सहित निर्बाधउन्मुक्त वातावरण उपलब्ध कराता है।

यह संस्थान नर्इ दिल्ली में आर्इ.टी.ओ के पास कोटला रोड़ पर सिथत है तथा 5-16 वर्श के बच्चों के लिए यहां कार्यकलाप उपलब्ध हैं। बाल भवन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। यहाँ रविवार, सोमवार एवं अन्य राजपत्रित अवकाश रहता हैं। इसकी समयावधि प्रात: 9:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक है।



राष्‍ट्रीय बाल भवन कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण जनता के लिए बंद है।








VIRTUAL EXHIBITIONS

The National Bal Bhavan has adopted the online mode as children have been locked into their homes for over a year. This includes very regular online teaching by our Arts and Science departments, and the organization of virtual exhibitions.

PANCHTANTRA STORIES
BE WITH YOGA, BE AT HOME
YOGA FOR WELLNESS -WOODCUT EXHIBIT


ऑनलाइन माध्यम के मुख्य आकर्षण (हाइलाइट्स)

कोविड-19 महामारी के कारण सख्त लॉकडाउन और स्कूलों के बंद होने के कारण बच्चे अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। इस दौरान राष्ट्रीय बाल भवन के परिसर को भी बंद कर दिया गया है। हालांकि कला एवं विज्ञान अनुभाग के बच्चों को पूरे जोर-शोर से ऑनलाइन माध्यम से लगातार प्रशिक्षित किया जाता आ रहा है। राष्ट्रीय बाल भवन में प्रत्येक कला अनुभाग अपने बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से ही प्रशिक्षित कर रहे हैं तथा उन शिक्षण वीडियो को राष्ट्रीय बाल भवन के यूट्यूब चैनल पर नियमित अपलोड भी करते आ रहे हैं।

भरतनाटयम
कंठ संगीत
लोक संगीत
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नाटक
चित्रकला
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फोटोग्राफी
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ऍअरो मॉडलिंग
कहानी सुनाना सत्र

EVENT HIGHLIGHT




राष्ट्रीय बाल भवन में राष्ट्रीय बाल सभा एवं एकीकरण शिविर को एक वार्षिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसका आयोजन प्रत्येंक वर्ष 14 नवम्ब्र से 19 नवंबर तक किया जाता है। 14 नवम्ब।र को राष्ट्री य बाल भवन के संस्थापक पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है । पंडित नेहरू ने बाल भवन की परिकल्पना बच्चों के लिए विद्यालय के अतिरिक्त एक गतिविधि केन्द्रा के रूप में की थी जहां बच्चे मैत्रीपूर्ण परिवेश में अपने पसंद की गतिविधियों में भाग ले सके तथा बच्चेब इस तरह के सुन्दर परिवेश, अवसर और प्रोत्साहन प्राप्तथ कर वे ऐसे परिपक्वथ एवं सृजनात्मुक प्रतिभागी बनें जो समाज की उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

रष्ट्रीय बाल भवन के संस्थापक, बालक-प्रेमी चाचा नेहरू के जन्म दिवस-14 नवंबर को उनकी सुखद स्मृति में ‘बाल दिवस’ के रूप में आयोजित किया जाता है। इस दिन आनंदोत्सव से परिपूर्ण भव्यशिष्ट – मनोरंजक मेले का आयोजन किया गया जिसमें भिन्नं-भिन्नप प्रकार के झूलों, आनन्दत की सवारी, टॉय ट्रेन की सवारी तथा बच्चों के लिए ससम्मा्न भोजन की व्यवस्थार भी रही। 1983 तक पूरे भारत में 18 राज्य स्तरीय बाल भवनों को मान्य ता दी गई थी । इसी बीच बोर्ड द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों के बच्चों में राष्ट्रीयता तथा चारित्रिक विकास हेतु एक राष्ट्रीय बाल सभा एवं एकीकरण शिविर का आयोजन करने का निश्चय किया गया। यह बच्चों का एक ऐसा शिविर है जहां समाज के सभी स्तर के बच्चों, जो विकास की मुख्यो धारा से वंचित हैं , उनके ज्ञान - वृद्धि, हेतु सादर उन्हेंच एक ही मंच पर लाया जाता है तथा पूरी श्रद्धा भाव के साथ एक - दूसरे के विचारों से अवगत होना, पवित्र भावनाओं का सृजनात्मक पोषण, समस्त पृथ्वी ही एक परिवार है और पृथ्वी पर रहने वाले सभी मनुष्य और जीव जंतु एक ही परिवार का हिस्सा है का बोध कराया जाता है। अत: यह वसुधैव कुटुम्बकम् मंत्र को आत्मसात करने के प्रतिरूप है । शिविर का मुख्यर उद्देश्य बच्चों को, एक साथ खेलना, भोजन करना, आनंदपूर्ण क्रियाकलाप की शैली सिखाना है तथा कला प्रधान प्रतिष्ठित गणमान्य विद्वानों के साथ संवाद करना एवं उनसे सृजनात्मक कला को सीखने में सहयोग करना है । अब तक ऐेसे 34 बाल सभा शिविर आयोजित हुए हैं जिसका उद्घाटन कई गणमान्य उच्चपदाधिकारियों द्वारा हुआ है जैसे - श्रीमती इंदिरा गांधी (बाल भवन की पहली अध्यआक्षा), श्री बी. संजीव रेड्डी, श्री राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, श्री बोम्महई, श्री आई.के. गुजराल, डॉ. मनमोहन सिंह, श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी एवं श्री अनिल स्वरूप आदि। विगत वर्षों में दूसरे देश जैसे – बुल्गाकरिया, रूस, मंगोलिया, नार्वे एवं अफगानिस्ता न के बच्चें भी इस शिविर का हिस्सा– रहे हैं।

प्रत्येहक वर्ष शिविर के लिए एक विशिष्ठस विषय (थीम) का चयन किया जाता है। इस वर्ष के लिए ‘’संस्कृएति संगम’’ को विषय (थीम) के रूप में चयन किया गया है। उक्तक थीम की आधारशिला अपने भारत की भव्यह सांस्कृ तिक विरासत है जिसके तहत 14 नवम्ब र से 19 नवम्बार, 2019 तक भारतीय संगीत, नृत्य्, पारंपरिक कलाओं एवं शिल्प् कलाओं की सांस्कृ तिक संगमों का आयोजन किया जाएगा। विभिन्न राज्यों् के बच्चेंी यहां शिरकत करेंगे एवं अपने-अपने राज्यों की पारम्प रिक नृत्यर की प्रस्तुेति करेंगे। इस अवसर पर बच्चोंअ के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित करने के उद्देश्य से राष्ट्री य बाल भवन द्वारा नृत्यअ और कला के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

इन तीन दिनों में राष्ट्री य बाल भवन तथा अन्य राज्यों के बाल-कलाकारों द्वारा उनके पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतति की जाएगी। उक्तव संस्कृ‍ति मेला में कला-प्रधान कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा जिसमें बाटिक, मधुबनी, मिट्टी के बर्तनों को बनाने की कला, सांझी कला, मेंहदी, कठपुतली बनाना इत्यकदि को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। मेले के दौरान बाल भवन के परिसर में सभी गतिविधि अनुभाग अपने-अपने कलाओं की प्रस्तुवति करेंगे। रचनात्म,क लेखन एवं कहानी सुनाने वाले विशेषज्ञों को भी सादर आमंत्रित किया गया है। राष्ट्री य बाल भवन, जवाहर बाल भवन, माण्डी और बाल भवन केन्द्रों के विभिन्नक गतिविधि अनुभागों के बच्‍चों द्वारा बनाई गई तरह-तरह की सुन्दरर व आकर्षक कलाकृतियों को भी प्रदर्शनी के लिए रखा जाएगा। बच्चोंत को रचनात्मक खेलों में भाग लेने के लिए अवसर भी दिए जाएंगे।

14 नवम्बवर को 2000 से अधिक बच्चेो उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेंगे। सभी शिविरवासी बच्चों को भागीदारी प्रमाण पत्र दिया जाएगा।




हमारे कार्यकलाप



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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून 2018।

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